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Know About Acharya Dharmendra Vats Guru Ji

परहित सेवा से बढ़ कर निज स्वार्थ नहीं हो सकता है,
दुर्बल पर प्रतिघात कभी पुरुषार्थ नहीं हो सकता।

अगर स्वयं श्री कृष्ण सारथी रथ के बन जाएँ मित्रों-
धर्मयुद्ध में कभी पराजित पार्थ नहीं हो सकता है ॥

माया सगी न तन सग्यौ सग्यौ न यह संसार।
परशुराम या जीव कौ सग्यौ है सृजनहार ॥

भक्तोदय चैरीटेबल ट्रस्ट के संस्थापक वैष्णवाचार्य श्री धर्मेन्द्र वत्स जी, श्री हरि की भक्ति में अपने बाल्यकाल से ही रम गए थे। इनके दादाजी श्री बाबूराम वत्स जी ने कहानियों और पूजा आरतियो के माध्यम से गुरूजी को श्री कृष्ण जी से परिचित करवाया। गुरूजी उनको बेहद रूचि से सुना करते थे और उन सब कथाओ से बेहद प्रभावित भी हुए। छह वर्ष की ही आयु में, गुरुजी प्राचीन गुरु शिष्य प्रणाली पर आधारित वैदिक गुरुकुल से शिक्षा प्राप्ति हेतु चले गए थे । गुरुकुल में ही गुरूजी ने अपने विद्वान शिक्षकों से भारतीय सभ्यता एवं वेदो के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त किया।

गुरूजी की प्रारंभिक शिक्षा विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा स्थापित बद्री भगत वेद विद्यालय, नई दिल्ली में हुई। विदूषक आचार्यो वेदमूर्ति आचार्य श्री चंद्रभानु शर्मा जी एवं आचार्य श्री राम कुमार शर्मा जी के सानिध्य में रह कर गुरुजी ने सामवेद और शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनीय संहिता का गहन अध्यन किया। इसके अतिरिक्त, गुरु जी ने वर्ष २००७ में स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य वेद-वेदांग संस्कृत महाविद्यालय से रामानुज पूजा पद्धति और कर्मकांड आदि का अध्ययन किया। इस महाविद्यालय की स्थापना हरियाणा के महान विदूषक संत जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने फरीदाबाद में करवाई थी। इस महाविद्यालय में अध्ययन के उपरान्त, गुरु जी गायत्री उपासना में पूर्णतः पारंगत हो गए।


वर्ष २०११ में, गुरुजी ने वृंदावन के महान विदूषक भागवत रत्न संत श्री मुनिराज जी महाराज से श्रीमद भागवत कथा, ज्योतिष, व्याकरण और संगीत विद्या का गहन ज्ञान प्राप्त किया।

जगतगुरु निम्बार्काचार्य श्री राधासर्वेश्वरशरण देवाचार्य श्री श्री जी महाराज ने गुरु जी को राजस्थान स्तिथ किशनगढ़ निम्बार्क तीर्थ में शरण दी। उन्ही के आशीर्वाद से, गुरूजी वैष्णव समुदाय का हिस्सा बने। वैष्णव समुदाय के द्वारा प्रदित सभी नियमो के सही अनुपालन करने से, गुरूजी को समुदाय द्वारा सत्संग आयोजन और धर्म चर्चा करने की जिम्मेदारी सौपी गयी।

शीघ्र ही, इनकी धार्मिक प्रसिद्धि और अद्वितीय उपलब्धियों का संज्ञान ले कर, देशभर के संतो एवं आचार्यो ने गुरु श्री धर्मेन्द्र वत्स जी को वैष्णवाचार्य की उपाधि से सम्मानित किया। अपने गुरुओ के आशीर्वाद एवं संत समाज के सहयोग से, गुरूजी अभी तक सैकड़ो भागवत कथा पाठ और हजारो यज्ञ आयोजन संपन्न कर चुके है। अपने देश के कल्याण हेतु, धर्म के विस्तार हेतु, वेद ज्ञान प्रचार हेतु, गौ माता की सेवा हेतु और समाज कल्याण हेतु, गुरु जी ने अपना यह जीवन पूरी निष्ठा से समर्पित कर दिया है।

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